प्रख्यातबलवीर्येण पुत्रेणेन्द्रजिता मम ।
यौ हि तौ भ्रातरौ वीरौ बद्धौ दत्तवरैः शरैः ।। ६.७२. ॥
prakhyātabalavīryeṇa putreṇendrajitā mama |
yau hi tau bhrātarau vīrau baddhau dattavaraiḥ śaraiḥ || 6.72. ||
Word by word from the Valmiki Ramayan Dataset (IIT Kanpur / Gyaandweep)
प्रख्यातबलवीर्येणwhose strength and prowess is well knownममपुत्रेणby my son इन्द्रजिता Indrajithतदाthenयौहिfamousवीरैःheroesदत्तवरैःblessed with boonsशरैःarrowsतौbothभ्रातरौbrothersबद्धौbond.
Translation
M. N. Dutt (1891–94), via Valmiki Ramayan Dataset"Both the famous brothers, Rama and Lakshmana were bound with arrows by my heroic son Indrajith who is conferred with boons and whose strength is well known.
Hindi
Gita Press, Gorakhpur (Hindi, via ramcharit.in)‘धूम्राक्ष अत्यन्त उग्र स्वभाव का बड़ा धनुर्धर था; अकम्पन, प्रहस्त और कुम्भकर्ण जैसे युद्ध के लिये सदा उत्सुक, शत्रुओं पर सदा विजय पाने वाले और कभी परास्त न होने वाले महाबली वीर थे—फिर भी अनायास ही सब कुछ कर डालने वाले श्रीराम के हाथों वे सब मारे गये। इनके अतिरिक्त और भी कितने ही पराक्रमी, विशालकाय तथा नाना अस्त्र-शस्त्रों में निपुण वीर राक्षस काल के गाल में समा गये। और तो और, मेरा वह पुत्र इन्द्रजित्, जिसके बल-पराक्रम की धाक सब ओर है, उसने भी— —राम-लक्ष्मण जैसे वीर भाइयों को वरदान-प्राप्त बाणों से बाँध दिया था; ऐसा भयंकर बन्धन, जिसे कोई देवता, बलवान् असुर, यक्ष, गन्धर्व या किन्नर तक न खोल सका। पर वे दोनों भाई किस शक्ति से, किस माया या मोहविद्या से उस बन्धन से मुक्त हो गये, यह मुझे आज तक समझ नहीं आया। और मेरी आज्ञा से युद्ध में गये जितने भी वीर राक्षस थे—
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