ते प्रयाता महात्मानः पार्थिवास्ते प्रहृष्टवत् । गजवाजिसहस्रौघैः कम्पयन्तो वसुन्धराम् ।। ७.३९. ॥
te prayātā mahātmānaḥ pārthivāste prahṛṣṭavat | gajavājisahasraughaiḥ kampayanto vasundharām || 7.39. ||
M. N. Dutt (1891–94), via Valmiki Ramayan DatasetThose great-souled kings departed joyfully, shaking the earth with their throngs of thousands of elephants and horses.
Gita Press, Gorakhpur (Hindi, via ramcharit.in)वे महात्मा राजा बड़े हर्षसे हजारों हाथी-घोड़ोंके समूहसे पृथ्वीको कँपाते हुए चल पड़े। श्रीरामके लिये भरतकी आज्ञासे वहाँ अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ उत्साहसे भरी हुई एकत्र हुई थीं। बलके गर्वसे भरे वे राजा कहते जाते थे—‘हमने तो रामरावणयुद्ध सामने खड़े होकर देखा ही नहीं। भरतने हमें बादमें व्यर्थ ही बुलाया; नहीं तो राजाओंके हाथों राक्षस तुरन्त मारे जाते, इसमें सन्देह नहीं। श्रीराम और लक्ष्मणके बाहुबलसे सुरक्षित रहकर हम निश्चिन्त होकर समुद्रके उस पार सुखसे लड़ लेते।’
This Hindi translation covers verses 39.1–39.5 together.