कुशाम्बम् कुशनाभम् च आसूर्तरजसम् वसुम् ।
दीप्ति युक्तान् महोत्साहान् क्षत्रधर्म चिकीर्षया ॥
kuśāmbam kuśanābham ca āsūrtarajasam vasum |
dīpti yuktān mahotsāhān kṣatradharma cikīrṣayā ||
Word by word from the Valmiki Ramayan Dataset (IIT Kanpur / Gyaandweep)
कुश:Kusaदीप्तियुक्तान्lustrousमहोत्साहान्men of great perseveranceधर्मिष्ठान्eager to observe righteousnessसत्यवादिन:men who always speak truthतान् पुत्रान्those sonsक्षत्रधर्मचिकीर्षयाwith a desire to carry out duties of warrior raceउवाचspoke.
Translation
M. N. Dutt (1891–94), via Valmiki Ramayan DatasetKusa addressed his four brilliant sons who were highly enthusiastic, pious, truthful and were wedded to duties of the warrior race:
Hindi
Gita Press, Gorakhpur (Hindi, via ramcharit.in)उनके नाम इस प्रकार हैं-कुशाम्ब, कुशनाभ, असूर्तरजस’ तथा वसु, ये सब-के-सब तेजस्वी तथा महान् उत्साही थे। राजा कुशने ‘प्रजारक्षणरूप’ क्षत्रिय-धर्मके पालन की इच्छा से अपने उन धर्मिष्ठ तथा सत्यवादी पुत्रों से कहा—’पुत्रो! प्रजाका पालन करो, इससे तुम्हें धर्म का पूरा-पूरा फल प्राप्त होगा’ १. रामायणशिरोमणि नामक व्याख्या के निर्माता ने ‘अमूर्तिरजसम्’ पाठ माना है। महाभारत के अनुसार इनका नाम ‘अमूर्तरयस्’ या ‘अमूर्तरया’ था (वन ९५।१७)। यहाँ इनके द्वारा धर्मारण्य नामक नगर बसानेका उल्लेख है। यह नगर धर्मारण्य नामक तीर्थभूत वन में था। यह वन गया के आस-पास का ही प्रदेश है। अमूर्तरया के पुत्र गयने ही गया नामक नगर बसाया था। अतः धर्मारण्य और गया की एकता सिद्ध होती है। महाभारत वनपर्व (८४१८५) में गया के ब्रह्मसरोवर को धर्मारण्य से सुशोभित बताया गया है। (वन० ८२६४७)
This Hindi translation covers verses 32.3–32.4 together.
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